स्वाहा यज्ञं कृणोतनेन्द्राय यज्वनो गृहे। तत्र देवाँ उप ह्वये॥
ऋग्वेद में स्वाहा कृतिः के 2 संदर्भ मिले
स्वाहा यज्ञं कृणोतनेन्द्राय यज्वनो गृहे। तत्र देवाँ उप ह्वये॥
पूषण्वते मरुत्वते विश्वदेवाय वायवे। स्वाहा गायत्रवेपसे हव्यमिन्द्राय कर्तन ॥
यजुर्वेद में स्वाहा कृतिः के 1 संदर्भ मिले
स्तो॒काना॒मिन्दुं॒ प्रति॒ शूर॒ऽइन्द्रो॑ वृषा॒यमा॑णो वृष॒भस्तु॑रा॒षाट्। घृ॒त॒प्रुषा॒ मन॑सा॒ मोद॑मानाः॒ स्वाहा॑ दे॒वाऽअ॒मृता॑ मादयन्ताम् ॥४६ ॥