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पण्डित क्षेमकरणदास त्रिवेदी
सृष्टि की धारणविद्या का उपदेश।
पदार्थान्वयभाषाः - [सृष्टि में] (ब्रह्म) ब्राह्मणत्व (च) और (क्षत्रम्) क्षत्रियत्व (च) ही (श्रोणी) दोनों कूल्हों और (बलम्) बल (ऊरू) दोनों जङ्घाओं [के समान है] ॥९॥
भावार्थभाषाः - मन्त्र ७ के समान है ॥९॥
टिप्पणी: ९−(ब्रह्म) ब्राह्मणत्वम् (च) (क्षत्रम्) अ० २।१५।४। क्षत्रियत्वम् (च) एव (श्रोणी) अ० २।३३।५। कटिभागौ (बलम्) (ऊरू) अ० २।३३।५। जानूपरिभागौ ॥
