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देवता: गौः ऋषि: ब्रह्मा छन्द: आसुरी गायत्री स्वर: गौ सूक्त

दे॒वानां॒ पत्नीः॑ पृ॒ष्टय॑ उप॒सदः॒ पर्श॑वः ॥

मन्त्र उच्चारण
पद पाठ

देवानाम् । पत्नी: । पृष्टय: । उपऽसद: । पर्शव: ॥१२.६॥

अथर्ववेद » काण्ड:9» सूक्त:7» पर्यायः:0» मन्त्र:6


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पण्डित क्षेमकरणदास त्रिवेदी

सृष्टि की धारणविद्या का उपदेश।

पदार्थान्वयभाषाः - [सृष्टि में] (देवानाम्) दिव्यगुणवाले [अग्नि, वायु आदि] पदार्थों की (पत्नीः) पालनशक्तियाँ (पृष्टयः) पसलियों की हड्डियों, (उपसदः) सङ्ग रहनेवाली [अग्नि वायु की तन्मात्राएँ] (पर्शवः) पसलियों [के समान हैं] ॥६॥
भावार्थभाषाः - जैसे शरीर की मोटी हड्डियों में पसलियाँ लगी हैं, वैसे ही अग्नि आदि की स्थूल और सूक्ष्म अवस्था का सम्बन्ध सृष्टि के साथ है ॥६॥
टिप्पणी: ६−(देवानाम्) दिव्यगुणवतामग्निवाय्वादीनाम् (पत्नीः) अ० २।१२।१। पालनशक्तयः (पृष्टयः) अ० ४।३।६। पार्श्वास्थीनि (उपसदः) संगताः सूक्ष्मतन्मात्राः (पर्शवः) स्पृशेः श्वण्शुनौ पृ च। उ० ५।२७। स्पृश स्पर्शने−शुन्, धातोश्च पृ इत्यादेशः। पार्श्वाधःस्थास्थीनि ॥