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पण्डित क्षेमकरणदास त्रिवेदी
सृष्टि की धारणविद्या का उपदेश।
पदार्थान्वयभाषाः - [वह] (युज्यमानः) ध्यान किया जाता हुआ (वैश्वदेवः) सब विद्वानों का हितकारी, (युक्तः) समाधि किया गया वह (विमुक्तः) विविध मुक्तस्वभाव (प्रजापतिः) प्रजापालक परमेश्वर (सर्वम्) व्यापक ब्रह्म [है] ॥२४॥
भावार्थभाषाः - परमात्मा की उपासना से मनुष्य सुखलाभ करते हैं ॥२४॥
टिप्पणी: २४−(युज्यमानः) ध्यायमानः (वैश्वदेवः) सर्वविदुषां हितः (युक्तः) समाहितः (प्रजापतिः) प्रजापालकः परमेश्वरः (विमुक्तः) विविधमुक्तस्वभावः (सर्वम्) व्यापकं ब्रह्म ॥
