वांछित मन्त्र चुनें

मि॒त्र ईक्ष॑माण॒ आवृ॑त्त आन॒न्दः ॥

मन्त्र उच्चारण
पद पाठ

मित्र: । ईक्षमाण: । आऽवृत्त: । आऽनन्द: ॥१२.२३॥

अथर्ववेद » काण्ड:9» सूक्त:7» पर्यायः:0» मन्त्र:23


0 बार पढ़ा गया

पण्डित क्षेमकरणदास त्रिवेदी

सृष्टि की धारणविद्या का उपदेश।

पदार्थान्वयभाषाः - [वह] (ईक्षमाणः) देखता हुआ (मित्रः) मित्र [हितकारी], (आवृत्तः) सन्मुख वर्तमान (आनन्दः) आनन्द [स्वरूप है] ॥२३॥
भावार्थभाषाः - सर्वदर्शी सर्वव्यापक परमेश्वर सब का हितकारी है ॥२३॥
टिप्पणी: २३−(मित्रः) हितः (ईक्षमाणः) पश्यन् सन् (आवृत्तः) समन्ताद् वर्तमानः (आनन्दः) सुखस्वरूपः ॥