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अ॒ग्निरासी॑न॒ उत्थि॑तो॒ऽश्विना॑ ॥

मन्त्र उच्चारण
पद पाठ

अग्नि: । आसीन: । उत्थित: । अश्विना ॥१२.१९॥

अथर्ववेद » काण्ड:9» सूक्त:7» पर्यायः:0» मन्त्र:19


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पण्डित क्षेमकरणदास त्रिवेदी

सृष्टि की धारणविद्या का उपदेश।

पदार्थान्वयभाषाः - [सृष्टि में वह प्रजापति] (आसीनः) बैठा हुआ (अग्निः) [पार्थिव वा जाठर] अग्नि, (उत्थितः) उठा हुआ वह (अश्विना) सूर्य और चन्द्रमा [के समान है] ॥१९॥
भावार्थभाषाः - जैसे अग्नि और सूर्य और चन्द्रमा अपने-अपने लोकों के लिये उपकारी हैं, वैसे ही परमेश्वर समस्त ब्रह्माण्ड का हितकारी है ॥१९॥
टिप्पणी: १९−(अग्निः) पार्थिवो जाठरोऽग्निर्वा (आसीनः) उपविष्टः (उत्थितः) (अश्विना) अ० २।२९।६। सूर्याचन्द्रमसौ यथा ॥