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पण्डित क्षेमकरणदास त्रिवेदी
सृष्टि की धारणविद्या का उपदेश।
पदार्थान्वयभाषाः - [सृष्टि में] (अभ्रम्) मेघ (पीबः) मेद [शरीर के समान चिकनाई], (निधनम्) राशीकरण (मज्जा) मज्जा [हड्डियों की चिकनाई के समान है] ॥१८॥
भावार्थभाषाः - मन्त्र १४ के समान है ॥१८॥
टिप्पणी: १८−(अभ्रम्) मेघः (पीबः) अ० १।११।४। पीव स्थौल्ये-असुन्, वस्य बः। शरीरस्नेहः (मज्जा) अ० १।११।४। अस्थिस्नेहः (निधनम्) अ० ९।६(५)।२। राशीकरणम् ॥
