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देवता: गौः ऋषि: ब्रह्मा छन्द: साम्नी बृहती स्वर: गौ सूक्त

न॒दी सू॒त्री व॒र्षस्य॒ पत॑य॒ स्तना॑ स्तनयि॒त्नुरूधः॑ ॥

मन्त्र उच्चारण
पद पाठ

नदी । सूत्री । वर्षस्य । पतय: । स्तना: । स्तनयित्नु: । ऊध: ॥१२.१४॥

अथर्ववेद » काण्ड:9» सूक्त:7» पर्यायः:0» मन्त्र:14


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पण्डित क्षेमकरणदास त्रिवेदी

सृष्टि की धारणविद्या का उपदेश।

पदार्थान्वयभाषाः - [सृष्टि में] (नदी) नदी (सूत्री) जन्मदात्री [नाड़ी], (वर्षस्य पतयः) वर्षा के रक्षक [मेघ] (स्तनः) स्तन [दूध के आधार], (स्तनयित्नुः) गर्जन (ऊधः) भेड़ [दूध के छिद्र स्थान के समान है] ॥१४॥
भावार्थभाषाः - सृष्टि और शरीर के अवयवों का परस्पर सम्बन्ध स्पष्ट है ॥१४॥
टिप्पणी: १४−(नदी) सरित् (सूत्री) अमिचिमिशसिभ्यः क्त्रः। उ० ४।—१६४। षूङ् प्राणिगर्भविमोचने−क्त्र, ङीप्। उत्पादयित्री नाडी (वर्षस्य पतयः) वृष्टिरक्षका मेघाः (स्तनाः) दुग्धाधाराः (स्तनयित्नुः) अ० ४।१५।११। गर्जनम् (ऊधः) अ० ४।११।४। आपीनम् ॥