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पण्डित क्षेमकरणदास त्रिवेदी
अतिथि के सत्कार का उपदेश।
पदार्थान्वयभाषाः - (एषः) वह [गृहस्थ] (एव) निश्चय करके (पयः) दूध [वा अन्न] (च च) और (रसम्) रस [स्वादिष्ठ पदार्थ] को... म० १ ॥२॥
भावार्थभाषाः - गृहस्थ लोग अतिथि का तिरस्कार करने से महाविपत्तियों में फँसते हैं ॥२-६॥
टिप्पणी: २−(पयः) दुग्धमन्नं वा (च) (वै) (एषः) (रसम्) स्वादिष्ठं पदार्थम् ॥
