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ध्रु॒वाया॑ दि॒शः शाला॑या॒ नमो॑ महि॒म्ने स्वाहा॑ दे॒वेभ्यः॑ स्वा॒ह्येभ्यः ॥

मन्त्र उच्चारण
पद पाठ

ध्रुवाया: । दिश: शालाया: । नम: । महिम्ने । स्वाहा । देवेभ्य: । स्वाह्येभ्य: ॥३.२९॥

अथर्ववेद » काण्ड:9» सूक्त:3» पर्यायः:0» मन्त्र:29


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पण्डित क्षेमकरणदास त्रिवेदी

शाला बनाने की विधि का उपदेश।[इस सूक्त का मिलान अथर्व काण्ड ३ सूक्त १२ से करो]

पदार्थान्वयभाषाः - (ध्रुवायाः दिशः) नीचेवाली दिशा से.... म० २५ ॥२९॥
भावार्थभाषाः - मनुष्यों को योग्य है कि पूर्वादि सब दिशाओं से पुष्कल अन्न आदि पदार्थ संग्रह करके शाला में रक्खें, जिस में विद्वान् लोग वेदों का विचार करते रहें ॥२५-३१॥
टिप्पणी: २९−(ध्रुवायाः) अ० ३।२६।४। नीचस्थायाः सकाशात् ॥