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पण्डित क्षेमकरणदास त्रिवेदी
रोग के विनाश का उपदेश।
पदार्थान्वयभाषाः - (भिषजः) वैद्य (मनुष्याः) लोग (यावतीषु) जितनी [ओषधियों] में (भेषजम्) चिकित्सा (विदुः) जानते हैं, (तावतीः) उतनी (विश्वभेषजीः) सब रोगों की जीतनेवाली [ओषधियों] को (त्वाम् अभि) तेरे लिये (आभरामि) मैं लाता हूँ ॥२६॥
भावार्थभाषाः - वैद्य लोग विद्वानों से विद्या प्राप्त करके चिकित्सा करें ॥२६॥
टिप्पणी: २६−(यावतीषु) (मनुष्याः) मानवाः (भेषजम्) चिकित्साम् (भिषजः) अ० २।९।३। यद्वा भिषज् चिकित्सायाम्-क्विप्। वैद्याः (विदुः) जानन्ति (तावतीः) (विश्वभेषजीः) सर्वरोगजेत्रीः (आभरामि) आहरामि (त्वाम्) (अभि) प्रति ॥
