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पण्डित क्षेमकरणदास त्रिवेदी
हिंसा के नाश का उपदेश।
पदार्थान्वयभाषाः - (अयम्) यह [प्रसिद्ध वेदरूप] (वीरः) पराक्रमी, (वीर्यवान्) सामर्थ्यवाला, (सपत्नहा) प्रतियोगियों का नाश करनेवाला, (शूरवीरः) शूरवीर, (परिपाणः) सब ओर से रक्षा करनेवाला, (सुमङ्गलः) बड़ा मङ्गलकारी, (प्रतिसरः) अग्रगामी, (मणिः) मणि [उत्तम नियम] (वीराय) वीर पुरुष में (बध्यते) बाँधा जाता है ॥१॥
भावार्थभाषाः - जो वीर पुरुष मणिरूप सर्वश्रेष्ठ वेदनियम पर चलते हैं, वे सुरक्षित रह कर सदा आनन्द भोगते हैं ॥१॥
टिप्पणी: १−(अयम्) सुप्रसिद्धो वेदरूपः (प्रतिसरः) अ० २।११।२। अग्रगामी (मणिः) अ० १।२९।१। नियमरत्नम्। प्रशंसनीयो नियमः (वीराय) पराक्रमिणे पुरुषाय (बध्यते) संयुज्यते (वीर्यवान्) सामर्थ्यवान् (सपत्नहा) प्रतियोगिनाशकः (शूरवीरः) शूराणां मध्ये वीरः (परिपाणः) अ० २।१७।७। सर्वतो रक्षकः (सुमङ्गलः) अतिमङ्गलकारी ॥
