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पण्डित क्षेमकरणदास त्रिवेदी
ब्रह्मविद्या का उपदेश।
पदार्थान्वयभाषाः - (इन्द्रः) ऐश्वर्यवान् जीव (तस्याः) उस [विराट्] का (वत्सः) उपदेष्टा, और (चमसः) अन्न का आधार [ब्रह्म] (पात्रम्) रक्षासाधन (आसीत्) था ॥२॥
भावार्थभाषाः - ऐश्वर्यवान् पुरुष परमेश्वरशक्ति का सदा उपदेश करते हैं ॥२॥
टिप्पणी: २−(चमसः) अ० ६।४७।३। अन्नाधारः परमेश्वरः। अन्यत् पूर्ववत् ॥
