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पण्डित क्षेमकरणदास त्रिवेदी
ब्रह्मविद्या का उपदेश।
पदार्थान्वयभाषाः - (तस्मात्) इसलिये (देवेभ्यः) किरणों को [वा किरणों से] (अर्धमासे) आधे महीने में (वषट्) रस पहुँचाना वे [ईश्वरनियम] (कुर्वन्ति) करते हैं, वह (देवयानम्) किरणों के जाने योग्य (पन्थाम्) मार्ग को (प्र जानाति) जान लेता है, (यः एवम् वेद) जो ऐसा जानता है ॥६॥
भावार्थभाषाः - ब्रह्मज्ञानी पुरुष किरणों और अर्धमास आदि के सम्बन्ध को यथावत् जान लेता है ॥६॥
टिप्पणी: ६−(देवेभ्यः) किरणानामर्थं किरणानां सकाशाद्वा (वषट्) अ० १।११।१। वह प्रापणे−डषटि। रसप्रापणम् (कुर्वन्ति) निष्पादयन्ति (देवयानम्) किरणैर्गन्तव्यम्। अन्यत् पूर्ववत् ॥
