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पण्डित क्षेमकरणदास त्रिवेदी
ब्रह्म विद्या का उपदेश।
पदार्थान्वयभाषाः - (अस्य) उस [पुरुष] के (देवहूतिम्) विद्वानों के लिये बुलावे में (देवाः) विद्वान् लोग (यन्ति) जाते हैं, वह (देवानाम्) विद्वानों का (प्रियः) प्रिय (भवति) होता है, (यः) जो (एवम्) ऐसा (वेद) जानता है ॥५॥
भावार्थभाषाः - ईश्वरमहिमा को जाननेवाला पुरुष विद्वानों का प्रिय होता है ॥५॥
टिप्पणी: ५−(यन्ति) गच्छन्ति (अस्य) तस्य (देवाः) विद्वांसः (देवहूतिम्) विद्वद्भ्य आह्वानम् (प्रियः) हितः (देवानाम्) विदुषाम्। अन्यत् सुगमम् ॥
