वांछित मन्त्र चुनें

गृ॑हमे॒धी गृ॒हप॑तिर्भवति॒ य ए॒वं वेद॑ ॥

मन्त्र उच्चारण
पद पाठ

गृहऽमेधी । गृहऽपति: । भवति । य: । एवम् । वेद॥१०.३॥

अथर्ववेद » काण्ड:8» सूक्त:10» पर्यायः:1» मन्त्र:3


0 बार पढ़ा गया

पण्डित क्षेमकरणदास त्रिवेदी

ब्रह्म विद्या का उपदेश।

पदार्थान्वयभाषाः - वह [पुरुष] (गृहमेधी) घर के काम समझनेवाला (गृहपतिः) गृहपति (भवति) होता है, (यः) जो (एवम्) ऐसा (वेद) जानता है ॥३॥
भावार्थभाषाः - मन्त्र १ और २ में वर्णित विराट् की महिमा जान कर मनुष्य संसार के कामों में चतुर होता है ॥३॥
टिप्पणी: ३−(गृहमेधी) सुप्यजातौ०। पा० ३।२।७८। गृह+मेधृ वधमेधासंगमेषु-णिनि। गृहं गृहकार्यं मेधति जानाति यः स (गृहपतिः) गृहस्वामी ॥