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पण्डित क्षेमकरणदास त्रिवेदी
ब्रह्म विद्या का उपदेश।
पदार्थान्वयभाषाः - [लोग] (अस्य) उसके (आमन्त्रणम्) अभिनन्दन में (यन्ति) जाते हैं, वह (आमन्त्रणीयः) अभिनन्दनयोग्य (भवति) होता है, (यः एवम् वेद) जो ऐसा जानता है ॥१३॥
भावार्थभाषाः - ईश्वरज्ञानी पुरुष उच्च पद पाकर संसार में अभिनन्दनयोग्य होते हैं ॥१३॥
टिप्पणी: १३−(आमन्त्रणीयः) आमन्त्रण-छ। अभिनन्दनीयः। अन्यत् पूर्ववत् ॥
