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सोद॑क्राम॒त्सा समि॑तौ॒ न्यक्रामत्।

मन्त्र उच्चारण
पद पाठ

सा । उत् । अक्रामत् । सा । सम्ऽइतौ । नि । अक्रामत् ॥१०.१०॥

अथर्ववेद » काण्ड:8» सूक्त:10» पर्यायः:1» मन्त्र:10


पण्डित क्षेमकरणदास त्रिवेदी

ब्रह्म विद्या का उपदेश।

पदार्थान्वयभाषाः - (सा उत् अक्रामत्) वह [विराट्] ऊपर चढ़ी (सा) वह (समितौ) संग्राम में (नि अक्रामत्) नीचे उतरी ॥१०॥
भावार्थभाषाः - संग्राम में ईश्वरशक्ति का प्रादुर्भाव होता है ॥१०॥
टिप्पणी: १०−(समितौ) संग्रामे-निघ० २।१७। अन्यत् पूर्ववत् ॥