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या ह॒स्तिनि॑ द्वी॒पिनि॒ या हिर॑ण्ये॒ त्विषि॑र॒प्सु गोषु॒ या पुरु॑षेषु। इन्द्रं॒ या दे॒वी सु॒भगा॑ ज॒जान॒ सा न॒ ऐतु॒ वर्च॑सा संविदा॒ना ॥

मन्त्र उच्चारण
पद पाठ

या । हस्तिनि । द्वीपिनि । या । हिरण्ये । त्विषि: । अप्ऽसु। गोषु । या । पुरुषेषु । इन्द्रम् । या । देवी । सुऽभगा । जजान । सा । न: । आ । एतु । वर्चसा । सम्ऽविदाना ॥३८.२॥

अथर्ववेद » काण्ड:6» सूक्त:38» पर्यायः:0» मन्त्र:2


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पण्डित क्षेमकरणदास त्रिवेदी

ऐश्वर्य पाने के लिये उपदेश।

पदार्थान्वयभाषाः - (या) जो (त्विषिः) ज्योति (हस्तिनि) हाथी में, (द्वीपिनि) चीते में, (या) जो (हिरण्ये) सुवर्ण में, और (या) जो (अप्सु) जल में (गोषु) गौ आदिकों में और (पुरुषेषु) पुरुषों में है। (या) जिस.. म० १ ॥२॥
टिप्पणी: २−(हस्तिनि) अ० ३।२२।३। गजेन्द्रे (द्वीपिनि) अ० ३।८।७। चित्रके (हिरण्ये) सुवर्णे (अप्सु) उदकेषु (गोषु) गवादिपशुषु (पुरुषेषु) मनुष्येषु ॥