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पण्डित क्षेमकरणदास त्रिवेदी
शत्रुओं के नाश का उपदेश।
पदार्थान्वयभाषाः - (यः) जो (शुक्रः) शुद्ध स्वभाव (अग्निः) ज्ञानस्वरूप परमेश्वर (अस्य) इस (रजसः) अन्तरिक्ष के (पारे) पार (अजायत) प्रकट हुआ है। (सः) वह (द्विषः) वैरियों को (अति) उलाँघ कर (नः) हमें (पर्षत्) भरपूर करे ॥५॥
भावार्थभाषाः - परमेश्वर प्रत्येक स्थान में व्यापक रहकर हमारी रक्षा करता है ॥५॥
टिप्पणी: ५−(यः) परमेश्वरः (अस्य) प्रत्यक्षस्य (पारे) अन्ते (रजसः) अन्तरिक्षलोकस्य−निघ० १।७। (शुक्रः) शुद्धस्वभावः (अजायत) प्रादुरभवत्। अन्यत्पूर्ववत् ॥
