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पण्डित क्षेमकरणदास त्रिवेदी
रोग के नाश के लिये उपदेश।
पदार्थान्वयभाषाः - (नव) नव (च च) और (नवतिः) नब्बे (याः) जो पीड़ायें (स्कन्ध्याः अभि) कन्धे की नाड़ियों में (संयन्ति) व्यापती हैं। (ताः सर्वाः) वे सब... म० १ ॥३॥
भावार्थभाषाः - मन्त्र १ के समान ॥३॥
टिप्पणी: ३−(नव च नवतिश्च) नवोत्तरनवतिसंख्याकाः (स्कन्ध्याः) स्कन्ध−यत्, स्कन्धे भवा धमनीः। अन्यद्गतम् ॥
