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पण्डित क्षेमकरणदास त्रिवेदी
गर्भाधान का उपदेश।
पदार्थान्वयभाषाः - (यथा) जैसे (इयम्) इस (मही) बड़ी (पृथिवी) पृथिवी ने (इमान्) इन (वनस्पतीन्) सेवा करनेवालों के रक्षक, वृक्ष आदि को (दाधार) धारण किया है (एव) वैसे ही (ते) तेरा... म० १ ॥२॥
टिप्पणी: २−(दाधार) धृतवती (इमान्) परिदृश्यमानान् (वनस्पतीन्) अ० १।१२।३। सेवकानां रक्षकान् वृक्षान्। अन्यत् पूर्ववत् ॥
