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पण्डित क्षेमकरणदास त्रिवेदी
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पदार्थान्वयभाषाः - (पृथिव्यै) पृथिवी [के राज्य] के लिये (स्वाहा) सुन्दर वाणी है ॥६॥
टिप्पणी: ६−(पृथिव्यै) भूमिराज्याय (स्वाहा) ॥
