पण्डित क्षेमकरणदास त्रिवेदी
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पदार्थान्वयभाषाः - (दिवे) व्यवहार के लिये (स्वाहा) प्रार्थना है ॥५॥
टिप्पणी: ५−(दिवे) व्यवहाराय ॥
