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अ॒न्तरि॑क्षाय॒ स्वाहा॑ ॥

मन्त्र उच्चारण
पद पाठ

अन्तरिक्षाय । स्वाहा ॥९.४॥

अथर्ववेद » काण्ड:5» सूक्त:9» पर्यायः:0» मन्त्र:4


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पण्डित क्षेमकरणदास त्रिवेदी

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पदार्थान्वयभाषाः - (अन्तरिक्षाय) मध्यलोक, वायुमण्डल [के ज्ञान] के लिये (स्वाहा) प्रार्थना है ॥४॥
टिप्पणी: ४−(अन्तरिक्षाय) द्यावापृथिव्योर्मध्ये वर्तमानाय वायुमण्डलाय ॥