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पण्डित क्षेमकरणदास त्रिवेदी
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पदार्थान्वयभाषाः - (पृथिव्यै) विस्तृत नीति के लिये (स्वाहा) सुन्दर वाणी है ॥२॥
टिप्पणी: २−(पृथिव्यै) विस्तृतायै नीतये (स्वाहा) ॥
