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पण्डित क्षेमकरणदास त्रिवेदी
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पदार्थान्वयभाषाः - (दिवे) प्रकाशमान परमेश्वर के लिये (स्वाहा) सुन्दर वाणी ॥१॥
टिप्पणी: १−(दिवे) प्रकाशमानाय परमात्मने (स्वाहा) अ० २।१६।१। सुवाणी प्रार्थना ॥
