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यं याचा॑म्य॒हं वा॒चा सर॑स्वत्या मनो॒युजा॑। श्र॒द्धा तम॒द्य वि॑न्दतु द॒त्ता सोमे॑न ब॒भ्रुणा॑ ॥

मन्त्र उच्चारण
पद पाठ

यम् । याचामि । अहम् । वाचा । सरस्वत्या । मन:ऽयुजा । श्रध्दा । तम् । अद्य । विन्दतु । दत्ता । सोमेन । बभ्रुणा ॥७.५॥

अथर्ववेद » काण्ड:5» सूक्त:7» पर्यायः:0» मन्त्र:5


पण्डित क्षेमकरणदास त्रिवेदी

पुरुषार्थ करने के लिये उपदेश।

पदार्थान्वयभाषाः - (यम्) जिस गुण को (अहम्) मैं (सरस्वत्या) विज्ञानयुक्त, (मनोयुजा) मन से जुड़ी हुई (वाचा) वाणी से (याचामि) माँगता हूँ। (बभ्रुणा) पोषण करनेवाले (सोमेन) परमेश्वर करके (दत्ता) दी हुई (श्रद्धा) श्रद्धा (तम्) उस गुण को (अद्य) आज (विन्दतु) पावे ॥५॥
भावार्थभाषाः - मनुष्य परमेश्वर में श्रद्धा करके विज्ञान और पराक्रमयुक्त वाणी से अपना मनोरथ शीघ्र सिद्ध करते हैं ॥५॥
टिप्पणी: ५−(यम्) गुणम् (याचामि) प्रार्थये (अहम्) पुरुषार्थी (वाचा) वाण्या (सरस्वत्या) विज्ञानवत्या (मनोयुजा) मनसा युक्त्या (श्रद्धा) भक्तिः (तम्) गुणम् (अद्य) वर्तमाने दिने (विन्दतु) प्राप्नोतु (दत्ता) प्रेरिता (सोमेन) परमेश्वरेण (बभ्रुणा) पोषकेण ॥