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पण्डित क्षेमकरणदास त्रिवेदी
राजा के धर्म का उपदेश।
पदार्थान्वयभाषाः - (याम्) जिस [हिंसा] को (ते) तेरे (पशूनाम्) पशुओं के मध्य (एकशफे) एक खुरवाले और (उभयादति) दोनों ओर दाँतवाले [अश्व आदि] पर (चक्रुः) उन्होंने किया है। (याम्) जिस (कृत्याम्) हिंसा को (गर्दभे) गधे पर... म० १ ॥३॥
भावार्थभाषाः - घोड़े गधे आदि उपकारी पशुओं की राजा रक्षा करे ॥३॥
टिप्पणी: ३−(एकशफे) एकखुरयुक्ते अश्वादौ (पशूनाम्) चतुष्पदां मध्ये (उभयादति) छान्दसो दीर्घः। उभयदति। ऊर्ध्वाधोभागयोर्दन्तयुक्ते (गर्दभे) कॄगॄशलिकलिगर्दिभ्योऽभच्। उ० ३।१२२। इति गर्द शब्दे−अभच्। खरे। अन्यद् गतम् ॥
