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पण्डित क्षेमकरणदास त्रिवेदी
समाज की वृद्धि करने का उपदेश।
पदार्थान्वयभाषाः - (महिषः) महान्, (देवः) व्यवहारकुशल (प्रजानन्) बड़ा ज्ञानी (सविता) प्रेरक पुरुष (अस्मिन्) इस (यज्ञे) संगति में (स्वाहा) सुन्दर वाणी से [पूजनीय कर्मों और विद्या आदि प्रकाश क्रियाओं को म० १] (युनक्तु) उपयुक्त करे ॥२॥
भावार्थभाषाः - बली विद्वान् पुरुष सभा आदि करके उत्तम कर्मों का प्रचार करे ॥२॥
टिप्पणी: २−(युनक्तु) उपयोगे करोतु−यजूंषि समिध इति अनुवर्त्तेते, म० १ (देवः) व्यवहारकुशलः (सविता) प्रेरकः प्रधानपुरुषः (प्रजानन्) प्रविद्वान् (महिषः) अ० २।३५।४। महान्। अन्यत् पूर्ववत् ॥
