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सोमो॑ युनक्तु बहु॒धा पयां॑स्य॒स्मिन्य॒ज्ञे सु॒युजः॒ स्वाहा॑ ॥

मन्त्र उच्चारण
पद पाठ

सोम: । युनक्तु । बहुऽधा। पयांसि । अस्मिन् । यज्ञे । सुऽयुज: । स्वाहा ॥२६.१०॥

अथर्ववेद » काण्ड:5» सूक्त:26» पर्यायः:0» मन्त्र:10


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पण्डित क्षेमकरणदास त्रिवेदी

समाज की वृद्धि करने का उपदेश।

पदार्थान्वयभाषाः - (सुयुजः) बड़ा योग्य (सोमः) शान्तस्वभाव पुरुष (स्वाहा) सुन्दर वाणी से (बहुधा) अनेक प्रकार (पयांसि) अन्नों को (अस्मिन्) इस (यज्ञे) परस्पर मेल में (युनक्तु) लगावे ॥१०॥
भावार्थभाषाः - मनुष्य विद्या आदि प्रचार में अन्नदान करके अपनी योग्यता बढ़ावे ॥१०॥
टिप्पणी: १०−(सोमः) शान्तस्वभावः पुरुषः (पयांसि) अन्नानि−निघ० २।७। अन्यद् गतम् ॥