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पण्डित क्षेमकरणदास त्रिवेदी
गर्भाधान का उपदेश।
पदार्थान्वयभाषाः - (यत्) जो औषध (राजा) राजा (वरुणः) वरणयोग्य पति (वेद) जानता है, (वा) और (यत्) जो (देवी) दिव्य गुणवाली, (सरस्वती) विज्ञानवती पत्नी [जानती है] और (यत्) जो (वृत्रहा) शत्रु वा रोगनाशक (इन्द्रः) बड़े ऐश्वर्यवाला वैद्य (वेद) जानता है, (तत्) वह (गर्भकरणम्) गर्भजनक औषध (पिब) पान कर ॥६॥
भावार्थभाषाः - विद्वान् पति और विदुषी पत्नी चतुर वैद्य की सम्मति से उचित आहार-विहार करके गर्भरक्षा में तत्पर रहें ॥६॥
टिप्पणी: ६−(यत्) औषधम् (वेद) जानाति (राजा) ऐश्वर्यवान् (वरुणः) वरणीयः पतिः (वा) समुच्चये (देवी) दिव्यगुणवती (सरस्वती) विज्ञानवती पत्नी (इन्द्रः) परमैश्वर्यवान् वैद्यः (वृत्रहा) शत्रो रोगस्य वा नाशकः (वेद) (तत्) (गर्भकरणम्) गर्भोत्पादकद्रव्यम् (पिब) पानेन सेवस्व ॥
