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पण्डित क्षेमकरणदास त्रिवेदी
ब्रह्म विद्या का उपदेश।
पदार्थान्वयभाषाः - (विकर्णः) विशेष श्रवण शक्तिवाला और (पृथुशिराः) विस्तीर्ण मस्तक शक्तिवाला पुरुष (तस्मिन्) उस (वेश्मनि) घर में (न) नहीं (जायते) होता है (यस्मिन्) जिस (राष्ट्रे) राज्य में.... ॥१३॥
भावार्थभाषाः - मनुष्य वेदविद्या से ही बहुश्रुत और विज्ञानी होते हैं ॥१३॥
टिप्पणी: १३−(न) निषेधे (विकर्णः) कर्ण भेदने−अच्। विशेषश्रवणः। बहुश्रतः (पृथुशिराः) विस्तीर्णमस्तकशक्तियुक्तः। बहुप्रज्ञः (तस्मिन्) (वेश्मनि) गृहे (जायते) उत्पद्यते ॥
