वांछित मन्त्र चुनें

यदि॑ सप्तवृ॒षोऽसि॑ सृ॒जार॒सोऽसि॑ ॥

मन्त्र उच्चारण
पद पाठ

यदि । सप्तऽवृष: । असि । सृज । अरस: । असि ॥१६.७॥

अथर्ववेद » काण्ड:5» सूक्त:16» पर्यायः:0» मन्त्र:7


0 बार पढ़ा गया

पण्डित क्षेमकरणदास त्रिवेदी

पुरुषार्थ का उपदेश।

पदार्थान्वयभाषाः - (यदि) जो तू (सप्तवृषः) सात [ऋषियों, पाँच ज्ञानेन्द्रिय मन और बुद्धि] पर समर्थ (असि) है... म० ॥७॥
भावार्थभाषाः - मनुष्य जितेन्द्रिय होकर आनन्द प्राप्त करें ॥७॥
टिप्पणी: ७−(सप्तवृषः) सप्त ऋषयः षडिन्द्रियाणि विद्या सप्तमी−निरु० १२।३७। सप्त ऋषिषु पञ्चज्ञानेन्द्रियमनोबुद्धिषु समर्थः ॥