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यदि॑ षड्वृ॒षोऽसि॑ सृ॒जार॒सोऽसि॑ ॥

मन्त्र उच्चारण
पद पाठ

यदि । षट्ऽवृष: । असि । सृज । अरस: । असि ॥१६.६॥

अथर्ववेद » काण्ड:5» सूक्त:16» पर्यायः:0» मन्त्र:6


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पण्डित क्षेमकरणदास त्रिवेदी

पुरुषार्थ का उपदेश।

पदार्थान्वयभाषाः - (यदि) जो तू (षड्वृषः) छह [काम, क्रोध, लोभ, मोह, मद, अहङ्कार] पर समर्थ (असि) है... म० १ ॥६॥
भावार्थभाषाः - मनुष्य काम क्रोध आदि षड् वर्ग को वश में रख कर उन्नति करें ॥६॥
टिप्पणी: ६−(षड्वृषः) षड्वर्गे कामक्रोधलोभमोहमदमात्सर्येषु समर्थः ॥