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यदि॑ चतुर्वृ॒षोऽसि॑ सृ॒जार॒सोऽसि॑ ॥

मन्त्र उच्चारण
पद पाठ

यदि । चतु:ऽवृष: । असि । सृज । अरस: । असि ॥१६.४॥

अथर्ववेद » काण्ड:5» सूक्त:16» पर्यायः:0» मन्त्र:4


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पण्डित क्षेमकरणदास त्रिवेदी

पुरुषार्थ का उपदेश।

पदार्थान्वयभाषाः - (यदि) जो तू (चतुर्वृषः) चार (धर्म, अर्थ, काम, मोक्ष) के द्वारा समर्थ (असि) है.... म० १ ॥४॥
भावार्थभाषाः - मनुष्य धर्म आदि चार प्रकार के पुरुषार्थों से वृद्धि करें ॥४॥
टिप्पणी: ४−(चतुर्वृषः) चतुर्वर्गेण धर्मार्थकाममोक्षैः पुरुषार्थैः समर्थः ॥