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यदि॑ द्विवृ॒षोऽसि॑ सृ॒जार॒सोऽसि॑ ॥

मन्त्र उच्चारण
पद पाठ

यदि । द्विऽवृष: । असि । सृज । अरस: । असि ॥१६.२॥

अथर्ववेद » काण्ड:5» सूक्त:16» पर्यायः:0» मन्त्र:2


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पण्डित क्षेमकरणदास त्रिवेदी

पुरुषार्थ का उपदेश।

पदार्थान्वयभाषाः - (यदि) जो तू (द्विवृषः) दो [परमात्मा और आत्मा] के साथ ऐश्वर्यवान् है.... म० ॥२॥
भावार्थभाषाः - मनुष्य ईश्वर और आत्मा के ज्ञान से अपना बल बढ़ावे ॥२॥
टिप्पणी: २−(द्विवृषः) द्वाभ्यां परमात्मात्मभ्यां वृषो वृषा, ऐश्वर्यवान् ॥