0 बार पढ़ा गया
पण्डित क्षेमकरणदास त्रिवेदी
पुरुषार्थ का उपदेश।
पदार्थान्वयभाषाः - (यदि) जो तू (द्विवृषः) दो [परमात्मा और आत्मा] के साथ ऐश्वर्यवान् है.... म० ॥२॥
भावार्थभाषाः - मनुष्य ईश्वर और आत्मा के ज्ञान से अपना बल बढ़ावे ॥२॥
टिप्पणी: २−(द्विवृषः) द्वाभ्यां परमात्मात्मभ्यां वृषो वृषा, ऐश्वर्यवान् ॥
