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पण्डित क्षेमकरणदास त्रिवेदी
पुरुषार्थ का उपदेश।
पदार्थान्वयभाषाः - (यदि) जो तू (एकवृषः) एक [परमेश्वर] के साथ ऐश्वर्यवान् (असि) है, [सुख] (सृज) उत्पन्न कर, [नहीं तो] तू (अरसः) निर्बल (असि) है ॥१॥
भावार्थभाषाः - एक परमात्मा के ज्ञान से मनुष्य संसार का उपकार कर सकता है, ईश्वरज्ञान के विना मनुष्यजन्म व्यर्थ है ॥१॥
टिप्पणी: १−(यदि) पक्षान्तरे (एकवृषः) वृषु प्रजननैश्ययोः−क। एकेन परमेश्वरेण सहैश्वर्य्यवान् (असि) (सृज) उत्पादय सुखम् [नोचेत्] इति शेषः (अरसः) असमर्थः (असि) ॥
