पण्डित क्षेमकरणदास त्रिवेदी
ब्रह्म की उत्तमता का उपदेश।
पदार्थान्वयभाषाः - [हे ब्रह्म !] (मे) मेरे लिये तू (अश्मवर्म) पत्थर के घर [के समान दृढ़] (असि) है। (यः) जो (अघायुः) बुरा चीतनेवाला मनुष्य (ध्रुवायाः) स्थिर वा नीचेवाली (दिशः) दिशा से.... म० १ ॥५॥
टिप्पणी: ५−(ध्रुवायाः) स्थिरायाः। अधःस्थायाः ॥
