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पण्डित क्षेमकरणदास त्रिवेदी
परमेश्वर के गुणों का उपदेश।
पदार्थान्वयभाषाः - (विचिन्वतीम्) [पदार्थों को] समेटनेवाली, (आकिरन्तीम्) फैलानेवाली, (अप्सराम्) अद्भुत रूपवाली, (साधुदेविनीम्) उचित व्यवहारवाली, (ग्लहे) [अपने] अनुग्रह में (कृतानि) कर्मों को (गृह्णानाम्) ग्रहण करती हुयी (ताम्) उस (अप्सराम्) आकाश आदि में व्यापक शक्ति को (इह) यहाँ पर (हुवे) मैं बुलाता हूँ ॥२॥
भावार्थभाषाः - सब मनुष्य परमेश्वर की अनन्त शक्तियों से अपने कार्य सिद्ध करके आनन्द प्राप्त करें ॥२॥
टिप्पणी: २−(विचिन्वतीम्) चिञ् चयने-शतृ। संघीकुर्वतीम् (आकिरन्तीम्) कॄ विक्षेपे-शतृ। विक्षिपन्तीम् (गृह्णानाम्) ग्रह उपादाने-शानच्। आददानाम्। अन्यत् पूर्ववत् म० २ ॥
