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पण्डित क्षेमकरणदास त्रिवेदी
स्वास्थ्यरक्षा का उपदेश।
पदार्थान्वयभाषाः - (अयम्) यह (मे) मेरा (हस्तः) [बायाँ] हाथ (भगवान्) भाग्यवान् है, और (अयम्) यह (मे) मेरा [दायाँ हाथ] (भगवत्तरः) अधिक भाग्यवान् है। (अयम्) यह (मे) मेरा [हाथ] (विश्वभेषजः) सर्वरोगनाशक, और (अयम्) यह (शिवाभिमर्शनः) छूने में मङ्गलदायक है ॥६॥
भावार्थभाषाः - मनुष्य श्वास-प्रश्वास और पञ्च भूतों के परिज्ञान से स्पर्श द्वारा रोगों का निदान करके शरीर को रोगरहित और पुष्ट करे ॥६॥ यह मन्त्र ऋग्वेद में है-म० १०। सू० ६। म० १२।
टिप्पणी: ६−(अयम्) दृश्यमानो वामहस्तः (मे) मदीयः (हस्तः) करः (भगवान्) भाग्यवान्। समर्थः (अयम्) दक्षिणहस्तः (भगवत्तरः) वामहस्ताद् अधिकभाग्यवान् (विश्वभेषजः) सर्वरोगनिवर्तकः (शिवाभिमर्शनः) मङ्गलस्पर्शयुक्तः। सुखस्पर्शः ॥
