वांछित मन्त्र चुनें
173 बार पढ़ा गया

शि॒वा भ॑व॒ पुरु॑षेभ्यो॒ गोभ्यो॒ अश्वे॑भ्यः शि॒वा। शि॒वास्मै सर्व॑स्मै॒ क्षेत्रा॑य शि॒वा न॑ इ॒हैधि॑ ॥

मन्त्र उच्चारण
पद पाठ

शिवा । भव । पुरुषेभ्य: । गोभ्य: । अश्वेभ्य: । शिवा । शिवा । अस्मै । सर्वस्मै । क्षेत्राय । शिवा । न: । इह । एधि ॥२८.३॥

अथर्ववेद » काण्ड:3» सूक्त:28» पर्यायः:0» मन्त्र:3


पण्डित क्षेमकरणदास त्रिवेदी

उत्तम नियम से सुख होता है।

पदार्थान्वयभाषाः - (हे यमिनि) उत्तम नियमवाली बुद्धि ! (पुरुषेभ्यः) पुरुषों के लिये (शिवा) कल्याणी और (गोभ्यः) गौओं को और (अश्वेभ्यः) घोड़ों को (शिवा) कल्याणी (भव) हो, (इह) यहाँ (अस्मै सर्वस्मै क्षेत्राय) इस सब खेत को (शिवा) कल्याणी और (नः) हमको (शिवा) कल्याणी (एधि) हो ॥३॥
भावार्थभाषाः - मनुष्य ईश्वर ज्ञान से उत्तम बुद्धि पाकर सब संसार को सुखदायी होता है ॥३॥
टिप्पणी: ३−(क्षेत्राय) अ० २।८।५। शालिगोधूमादिकेदारवर्धनाय (एधि) अस्तेर्लोटि रूपम्। भव। अन्यत् स्पष्ठम् ॥