बुद्धि बढ़ाने के लिये प्रभात गीत।
पदार्थान्वयभाषाः - (वयम्) हम (प्रातर्जितम्) प्रातःकाल में [अन्धकारादि को] जीतनेवाले (भगम्) सूर्य [समान] (उग्रम्) तेजस्वी (पुत्रम्) पवित्र, अथवा बहुविधि से रक्षा करनेवाले, अथवा नरक से बचानेवाले [परमेश्वर] को (हवामहे) बुलाते हैं, (यः) जो [परमेश्वर] (अदितेः) प्रकृति वा भूमि का (विधर्त्ता) धारण करनेवाला और (यम्) जिस [परमेश्वर] को (मन्यमानः) पूजता हुआ (आध्रः) सब प्रकार धारण योग्य कंगाल, (चित्) भी, और (तुरः) शीघ्रकारी बलवान् (चित्) भी, और (राजा) ऐश्वर्यवान् राजा (चित्) भी (इति) इस प्रकार (आह) कहता है,(यम्) यश और (भगम्) धन को (भक्षि=अहं भक्षीय) मैं सेवूँ ॥२॥
भावार्थभाषाः - जैसे सूर्य प्रातःकाल अन्धकार, आलस्यादि मिटाकर जीवों में नयी शक्ति देता है, ऐसे ही सब छोटे बड़े जीव और पृथिवी आदि लोक भी परमात्मा की शक्ति से अपनी अपनी शक्ति बढ़ाते हैं, उसीका धन्यवाद हम सब पिता पुत्रादि मिलकर गावें ॥२॥ हवामहे के स्थान पर ऋग्वेद और यजुर्वेद में हुवेम पद है ॥