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पण्डित क्षेमकरणदास त्रिवेदी
नवीनशाला का निर्माण और प्रवेश।
पदार्थान्वयभाषाः - (इमाः) इस (अयक्ष्माः) रोगरहित (यक्ष्मनाशनीः) रोगनाशक (अपः) जल को (प्र) अच्छे प्रकार (आ भरामि) मैं लाता हूँ। (अमृतेन) मृत्यु से बचानेवाले अन्न, घृत, दुग्धादि सामग्री और (अग्निना सह) अग्नि के सहित (गृहान्) घरों में (उप=उपेत्य) आकर (प्र) अच्छे प्रकार (सीदामि) मैं बैठता हूँ ॥९॥
भावार्थभाषाः - गृहपति रोगों से बचने और स्वास्थ्य बढ़ाने के लिये अपने घर में शुद्ध जल, अग्नि आदि पदार्थों का सदा उचित प्रयोग करें ॥९॥
टिप्पणी: ९−(इमाः)। दृश्यमानाः। (आ)। समन्तात्। (अपः)। जलानि। (प्र)। (भरामि)। हरामि। (अयक्ष्माः)। यक्ष्मरहिताः। (यक्ष्मनाशनीः)। यक्ष्मनाशिकाः। स्वास्थ्यवर्धयित्रीः। (गृहान्)। भवनानि। (उप)। उपेत्य। (सीदामि)। उपविशामि। (अमृतेन)। नास्ति मृतं येन तेन। पौष्टिकेन। अन्नघृतदुग्धादिपदार्थसमूहेन। (अग्निना)। पावकेन। (सह)। सहितः ॥
