0 बार पढ़ा गया
पण्डित क्षेमकरणदास त्रिवेदी
परमेश्वर की उपासना का उपदेश।
पदार्थान्वयभाषाः - (इन्द्र) हे इन्द्र ! [परमेश्वर] (त्वम्) तू (सुतानाम्) उत्पन्न हुए पदार्थों का, और (त्वम्) तू (असुतानाम्) न उत्पन्न हुए [परमाणुरूप] पदार्थों का (ईशिषे) स्वामी है, (त्वम्) तू (जनानाम्) उत्पन्न होनेवालों का (राजा) राजा है ॥३॥
भावार्थभाषाः - परमेश्वर ही परमाणुओं के संयोग-वियोग से भूत, भविष्यत् और वर्तमान सृष्टि का स्वामी है ॥३॥
टिप्पणी: ३−(त्वम्) (ईशिषे) ईश्वरो भवसि (सुतानाम्) उत्पन्नानां पदार्थानाम् (इन्द्र) हे परमेश्वर (त्वम्) (असुतानाम्) अनुत्पन्नानां परमाणुरूपपदार्थानाम् (त्वम्) (राजा) (जनानाम्) जनिष्यमाणानाम् ॥
