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पण्डित क्षेमकरणदास त्रिवेदी
सेनापति के लक्षणों का उपदेश।
पदार्थान्वयभाषाः - (पुरुष्टुत) हे बहुतों से बड़ाई किये गये (इन्द्रः) इन्द्र ! [बड़े ऐश्वर्यवाले सेनापति] (क्रतुविदम्) बुद्धि प्राप्त करानेवाले, (तातृपिम्) तृप्त करानेवाले, (सुतम्) सिद्ध किये हुए (सोमम्) सोम [महौषधियों के रस] की (हर्य) इच्छा कर, (पिब) पी (आ) और (वृषस्व) बलवान् हो ॥४॥
भावार्थभाषाः - सेनापति बल और बुद्धि बढ़ानेवाले खान-पान के भोजन से तृप्त रहकर स्वस्थ रहे ॥४॥
टिप्पणी: यह मन्त्र आ चुका है-अ० २०।६।२ ॥ ४−अयं मन्त्रो व्याख्यातः-अ० २०।६।२ ॥
