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पण्डित क्षेमकरणदास त्रिवेदी
परमेश्वर की उपासना का उपदेश।
पदार्थान्वयभाषाः - (गुहा) गुहा [गुप्त अवस्था] में (सतीः) वर्तमान (गाः) वाणियों को (आविः कृण्वन्) प्रकट करते हुए उस [परमेश्वर] ने (अङ्गिरोभ्यः) विज्ञानी पुरुषों के लिये (उत् आजत्) ऊँचा पहुँचाया और (वलम्) हिंसक [विघ्न] को (अर्वाञ्चम्) नीचे (नुनुदे) हटाया है ॥२॥
भावार्थभाषाः - प्रलय के पीछे परमात्मा ने वेदों का उपदेश करके हमारे सब विघ्न मिटाये हैं ॥२॥
टिप्पणी: २−(उत्) ऊर्ध्वम् (गाः) वाणीः। विद्याः (आजत्) अज गतिक्षेपणयोः-लङ्। अगमयत् (अङ्गिरोभ्यः) अ० २।१२।४। विज्ञानिभ्यः (आविष्कृण्वन्) प्रकटयन् (गुहा) गुहायाम्। गुप्तावस्थायाम् (सतीः) विद्यमानाः (अर्वाञ्चम्) अधोगतम् (नुनुदे) प्रेरितवान् (वलम्) हिंसकं विघ्नम् ॥
