वांछित मन्त्र चुनें

इ॒मा ब्रह्म॑ ब्रह्मवाहः क्रि॒यन्त॒ आ ब॒र्हिः सी॑द। वी॒हि शू॑र पुरो॒डाश॑म् ॥

मन्त्र उच्चारण
पद पाठ

इमा । ब्रह्म । ब्रह्मऽवाह: । क्रियन्ते ।आ । बर्हि: । सीद । वीहि । शूर । पुरोलाशम् ॥२३.३॥

अथर्ववेद » काण्ड:20» सूक्त:23» पर्यायः:0» मन्त्र:3


0 बार पढ़ा गया

पण्डित क्षेमकरणदास त्रिवेदी

राजा और प्रजा के कर्तव्य का उपदेश।

पदार्थान्वयभाषाः - (ब्रह्मवाहः) हे अन्न पहुँचानेवाले ! (इमा) यह (ब्रह्म) वेदज्ञान (क्रियन्ते) किये जाते हैं, (बर्हिः) उत्तम आसन पर (आ सीद) बैठ। (शूर) हे शूर ! [दुष्टनाशक] (पुरोडाशम्) अच्छे बने हुए अन्न का (वीहि) भोजन कर ॥३॥
भावार्थभाषाः - प्रजागण अन्नदाता राजा को उत्तम आसन पर बैठा कर और उत्तम पदार्थ भेंट करके वेद अनुकूल निवेदन करें ॥३॥
टिप्पणी: ३−(इमा) इमानि (ब्रह्म) ब्रह्माणि। वेदज्ञानानि (ब्रह्मवाहः) वसेर्णित्। उ० ४।२१८। वह प्रापणे-असुन् णित्। ब्रह्म अन्ननाम-निघ० २।७। हे अन्नप्रापक। अन्नदातः (क्रियन्ते) अनुष्ठीयन्ते (बर्हिः) उत्तमासनम् (आसीद) उपविश (वीहि) (भक्षय) (शूर) हे दुष्टनाशक (पुरोडाशम्) अ० ८।८।२२। सुसंस्कृतमन्नम् ॥