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तस्य॑ अनु॒ निभ॑ञ्जनम् ॥

मन्त्र उच्चारण
पद पाठ

तस्य । अनु । निभञ्जनम् ॥१३१.२॥

अथर्ववेद » काण्ड:20» सूक्त:131» पर्यायः:0» मन्त्र:2


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पण्डित क्षेमकरणदास त्रिवेदी

ऐश्वर्य की प्राप्ति का उपदेश।

पदार्थान्वयभाषाः - (तस्य) हिंसक विघ्न का (अनु) लगातार (निभञ्जनम्) विनाश होवे ॥२॥
भावार्थभाषाः - मनुष्य पूर्वज विद्वानों के समान विघ्नों को हटाकर अनेक प्रकार के ऐश्वर्य प्राप्त करें ॥१-॥
टिप्पणी: २−(तस्य) तर्द हिंसे-डप्रत्ययः। हिंसकस्य विघ्नस्य। चौरस्य (अनु) निरन्तरम् (निभञ्जनम्) विनाशनम् ॥