पण्डित क्षेमकरणदास त्रिवेदी
मनुष्य के लिये प्रयत्न का उपदेश।
पदार्थान्वयभाषाः - (अनामया) नीरोग और (उपजिह्विका) उपकारी जिह्वा [वाणी]वाली है ॥२०॥
भावार्थभाषाः - उत्तम बुद्धिवाला मनुष्य शीघ्र काम करनेवाला, स्वस्थ और उपकारी वचन बोलनेवाला होता है ॥१९, २०॥
टिप्पणी: २०−(अनामया) वलिमलितनिभ्यः कयन्। उ० ४।९९। अम पीडने चुरा०-कयन्, टाप्। रोगरहिता। (उपजिह्विका) शेवायह्वजिह्वा०। उ० १।१४। जि जये-वन् डुक् च, टाप्। उप उपकारिका जिह्वा वाणी यस्याः सा ॥
